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Abstract
भारत में वैदिक समय से ही सभा और समितियो का उल्लेख पाया जाता है जो ग्रामीण स्तर पर निर्णय करती थी। गाँधी जी का भी सपना था कि भारत में पंचायत स्तर पर निर्णय लिए जाए और लोकंतत्र लागू किया जाए। स्वतत्रता के बाद संविधान के अनुच्छेद 40 में कुछ प्रावधान किए गए। बाद मे 73, वें 74 वें सविधान संशोधन से स्थानीय सरकार को सैंविधानिक दर्जा दिया गया। जिसमें महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान किया गया जो 33 प्रतिशत था । कुछ राज्यों में अब इसे 50 प्रतिशत कर दिया गया है। हरियाणा में तो पंचायतों के चुनाव के लिए शैक्षणिक योग्यता भी निर्धारित की गई है।