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European Journal of Business &

Social Sciences

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Volume 07 Issue 02

February 2019

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श्री नारायण गुरु जी के विचार ि विक्षाएं तथा उनका िततमान मेंमहत्व और

प्रासंवगकता

नाम-शमशेर स िंह,चरखी दादरी,

Email Id –sam131180.ss@gmail.com

Abstract –

श्री नारायण गुरु एक रहस्यवादी िंत] कसव]दाशशसनक ] माज ुधारक] सशक्षासवद तथा मनुष्यत्व

का अद् भुत म्मिश्रण थे। वह एक अ ाधारण िंत थे]सजन्हिंनेगरीबहिंऔर माज के दबेकु चलेवगों के

ामासजक ,आसथशक तथा शैक्षसणक स्तर कह ऊिं चा उठानेका प्रया सकया। अपनेजीवन और कायों े

के रल के माज के ाथ- ाथ दसक्षण भारत के माज मेंगुरु जी िंपूणशपररवतशन लेकर आए। यसद आज

के रल शत प्रसतशत ाक्षरता वाला प्रदेश हैऔर मानवीय सवका की ूची मेंप्रथम स्थान पर हैतह स र्श

श्री नारायण गुरु के यहगदान की वजह ेहै।श्री नारायण गुरु जी ने माज के सनम्न वगशके सवका के सलए

अनेक प्रया सकए । उन्हिंनेसनम्नवगशके मिंसदरहिंमेंप्रवेश के सलए अनेक आिंदहलन सकए, अपनेस्तर पर

मिंसदरहिंका सनमाशण करवाया । वेमानतेथेसक भी मनुष्यहिंकी एक जासत, एक धमशहै। वह मनुष्य के जन्म

के आधार पर भेदभाव के म्मखलार् थे। उन्हिंनेउ मय भी सशक्षा के सवका पर बल सदया, माज में

व्याप्त कु रीसतयहिंके म्मखलार् आवाज उठाई । गुरु जी नेस्त्री सशक्षा ,म्मस्त्रयहिं े िंबिंसधत अनेक कु रीसतयहिंकह

दू र करनेका प्रया सकया । गुरुजी के बाद जह भी माज ुधारक हुए उन्हिंनेगुरु जी के सवचारहिंव

सशक्षाओिंकह अपने- अपनेकायशक्रमहिंमेंशासमल सकया चाहेउनमेंज्यहसतबा र्ु लेजी हैंया भीमराव

अिंबेडकर जी हह या रामास्वामी , भी नेगुरु जी के सवचारहिं ेप्रेरणा लेकर के अपनेकायशक्रम की शुरुआत

की । गुरु जी के सवचारहिंकी झलक हम भारत के िंसवधान मेंभी देख कतेहैं। गुरु जी के सवचार व

सशक्षाएिं सजतनेउ मय पर आवश्यक थे, उ ेकही िंज्यादा वतशमान मेंहै, क्हिंसक हमारेभारतवर्शकी

जह मस्याएिं और कु रीसतयााँमौजूद हैं,उनकह दू र करनेमेंयह दशशन कार्ी उपयहगी हह कता है।

Keywords –

श्री नारायण गुरु जी, के रल, एजवा, सवचार, सशक्षाएिं, िंत, कसव,दाशशसनक , माज ुधारक

, सशक्षासवद, ामासजक कु रीसतयािं ,धासमशक आडिंबर ,जन्म के आधार पर भेदभाव ,मिंसदरहिंमेंप्रवेश ,स्त्री

सशक्षा , मनुष्य के सलए एक जासत, एक धमशतथा एक भगवान, सशक्षा के माध्यम ेप्रगसत, िंगठन के

माध्यम ेशम्मि ।

जन्म तथा विक्षा

श्री नारायण गुरु जी का जन्म दसक्षण के रल मेंसिवेंद्रम सजलेके चिंबजिंती नामक गािंव मेंएक ाधारण

पररवार में1856 मेंहुआ था । उनके सपताजी का नाम मदन आ न तथा माता जी का नाम कु टी अिा

था। गुरु जी का जन्म एजवा नामक जासत मेंहुआ था , जह की उ मय अश्पृस्य मझी जाती थी । बचपन

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मेंगुरुजी कह नानूनाम ेपुकारा जाता था । नानूकी सशक्षा 5 वर्शकी आयु ेही शुरु हह गई थी ।उनके

गुरु मुतासपल्लेनाम के एक बहुत बडेसवद्वान थे। इ के बाद न 1876 मेंनानूकह उच्च सशक्षा के

सलए एक सवद्वान एविं वणशगुरु करुणागल्ली के पा भेजा गया था। नारायण अध्ययन मेंबहुत ही

कु शाग्र बुम्मि के छाि थे, एक बार उन्ेंकु छ भी स खा सदया जाता था तह भी उ ेभूलतेनही िंथे।

इ ी प्रकार ेनारायण गुरु जी नेअपनी सशक्षा पूणशकी थी ।

श्री नारायण गुरु जी के विचार तथा विक्षाएं –

श्री नारायण गुरु नेकभी भार्ण नही िंसदए, कभी पुस्तके नही िंसलखी और ना ही कभी लेख सलखें। उन्हिंने

िंस्कृ सत उन्हिंने िंस्कृ त, तसमल और मलयालम मेंकसवताएिं सलखी। उनकी कई लहगहिंके ाथ सभन्न-सभन्न

स्थानहिंपर और सभन्न-सभन्न अव रहिंपर कु छ महत्वपूणशऔर रहचक बातचीत हुई सज ेगुरु जी के सवचारहिं

के बारेमेंपता चलता है।

जावत के बारेमेंपूछो मत,कहो मत ,सोचो मत :-

श्री नारायण गुरु जी का कहना था सक

हमेंसक ी की भी जासत के बारेमेंपूछना नही िंचासहए । हमेंसक ी की भी जासत के बारेमें कहना भी नही िं

चासहए और ना ही हमेंजासत-पासत के बारेमेंकहई सवचार करना चासहए । हमें जासत-पासत ेरसहत माज

के बारेमें हचना चासहए ।

मनुष्य के विए एक जावत, एक धमततथा एक भगिान :-

गुरुजी भी मनुष्यहिंकह एक ही जासत का मानतेथे, उनका मानना था सक िंपूणशमनुष्य के सलए एक ही धमश

व एक ही भगवान हहना चासहए । वह मनुष्य कह जासत तथा धमशके आधार पर बािंटनेके सवरहधी थे।

विक्षा के माध्यम सेप्रगवत, संगठन के माध्यम सेिक्ति :-

गुरुजी सशक्षा कह प्रगसत का आधार मानतेथे। उन्हिंनेस्वयिं भी कई पाठशालाओिंकी स्थापना की थी। वह

मानतेथेसक िंगसठत हहकर हम शम्मि कह प्राप्त कर कतेहैं, हम िंगठन के द्वारा ही अपनेउद्देश्यहिंकह

प्राप्त करनेमें र्ल हह कतेहैं।

हमारी सामावजक व्यिस्था ऐसी होनी चावहए, वजससेवक संपूणतमानि जावत एकजुट हो :-

गुरु जी जासत, वणश, धमश ेरसहत एक माज का सनमाशण करना चाहतेथे, सज में भी व्यम्मियहिं

का एक ही जासत तथा एक ही धमश, मानव धमशहहना चासहए, सज े िंपूणशमानव जासत एकजुट हह के ।

स्त्री विक्षा तथा क्तस्त्रयो ंसेसंबंवधत सुधार :-

गुरुजी म्मस्त्रयहिंकी सशक्षा देनेपर बहुत बल देतेथे।उन्हिंनेम्मस्त्रयहिं े िंबिंसधत अनेक ुधारहिंपर बल

सदया । उन्हिंनेबहु पत्नी प्रथा, दहेज प्रथा े िंबिंसधत ुधार सकए। उन्हिंने माज में ेइन बुराइयहिंपर कह

हटानेपर बल सदया ।

िराब जहर है,इसेन तो बनाओ , न ही बेचो और न ही वपयो :-

गुरुजी शराब कह जहर के मान मानतेथे। वेशराब के ेवन, सनमाशण और बेचनेके ख्त म्मखलार् थे।

वेशराब कह ब बुराइयहिंकी जड मानतेथे।

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गुरु जी के विचारो ंऔर विक्षाओंका िततमान मेंमहत्व तथा प्रासंवगकता :-

भारत की आजादी के 70 वर्ों बाद भी हमारेदेश का माज मेंअनेक मस्याएिं हैं। हमारा देश आज भी

जासत, धमश,प्रािंत, भार्ा के आधार पर सवभासजत है। हमारेदेश मेंजासत, धमश,भार्ा के आधार पर आए

सदन दिंगेतथा र् ाद हहतेरहतेहैं। माज मेंआज भी ीमािंत वगशकी म्मस्थसत हचनीय है, माज मेंउनके

ाथ भेदभाव हहता रहता है। ीमािंत वगशकी सशक्षा की म्मस्थसत भी सनम्न है। असशसक्षत व्यम्मि अपना ही

कल्याण नही िंकर कता, तह देश की उन्नसत मेंक्ा यहगदान देगा। जब तक सक ी व्यम्मि कह अपने

असधकारहिंका ज्ञान ही नही िंहहगा तह वह उन्ेंकै ेप्राप्त कर के गा । हमारेदेश मेंआज भी म्मस्त्रयहिंकी

म्मस्थसत कार्ी सनम्न दजे की है, उनके ाथ आज भी अनेक अत्याचार हह रहेहैं। म्मस्त्रयहिंकी म्मस्थसत मेंभी

ुधार की आवश्यकता है।देश मेंमसदरा का ेवन सदनहिंसदन बढ़ता जा रहा है। गरीब तबके मेंभी शराब

का ेवन बढ़ता जा रहा है।शराब ेस्वास्थ्य, धन तथा पररवार भी का नाश हहता है।

इ प्रकार हम देखतेहैंसक श्री नारायण गुरु जी के सवचारहिंकी सजतनी आवश्यकता आज हैइतनी

आवश्यकता शायद 125 वर्ों पहलेभी न हह । गुरु जी के सवचारहिंऔर सशक्षाओिं के द्वारा वतशमान माज

की ऐ ी पररम्मस्थसत मेंपररवतशन लाया जा कता है। गुरु जी के सवचारहिंद्वारा वतशमान माज की मस्याओिं

कह हल सकया जा कता है। उनकी सशक्षाओिंऔर सवचारहिंका प्रचार- प्र ार सकया जाए तथा उन पर

सक्रयान्वन करना चासहए ।

वनष्कर्त

श्री नारायण गुरु जी एक महान िंत, दाशशसनक , माज ुधारक ,सशक्षासवद तथा अद् भुत व्यम्मित्व के धनी

थे।वह ऐ े न्या ी थेसजन्हिंनेपागल खानेकह’ ईश्वर के अपनेदेश’ मेंबदल सदया । उनकी सशक्षा और

सवचारहिंकी आज भी उतनी ही आवश्यकता हैसजतनी 125 वर्शपहलेथी।

हमेंउनकी सशक्षा और सवचारहिंकह अपनेजीवन मेंधारण करना चासहए तथा देश मेंजन-जन तक पहुिंचाना

चासहए ।

संदभतग्रंथ

1. प्र ाद नारायण मुसन ,"गारलेंड ऑफ़ सवज़न : द दशशनमाला ऑफ़ नारायण गुरु " " डी के सप्रिंट

सलसमटेड, नई सदल्ली, 2007।

2. प्र ाद नारायण मुसन ,"थ्री आचायश एिं ड नारायण गुरु" डी के सप्रिंट सलसमटेड, नई सदल्ली, 2011 ।

3. जयकु मार सवजयालयम,"श्री नारायणा गुरु : ए सक्रसटकल स्टडी" डी के सप्रिंट सलसमटेड, नई सदल्ली,

2017 ।

4. गुरु नटराज ,"द वडशऑफ़ द गुरु : द लाइर् एिं ड टीसचिंग्स ऑफ़ गुरु नारायणा" डी के सप्रिंट सलसमटेड,

नई सदल्ली, 2008।

5. रामुन्नी मुरकहट -"श्री नारायण गुरु " श्री नारायण मिंसदर समसत प्रकाशन ,मुिंबई,2016 ।

6. धमशतीथशर स्वामी -"श्री नारायण गुरु के अनमहल वचन " श्री नारायण मिंसदर समसत प्रकाशन ,मुिंबई ।

7. कनहप्पा मुरकहट -"श्री नारायण गुरु "नेशनल बुक टरस्ट इिंसडया प्रकाशन, नई सदल्ली।